
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। उत्तर प्रदेश फर्जी कफ सिरप रैकेट का किंगपिन कौन? अब तक 40 FIR, बांग्लादेश तक होती थी सप्लाई।।
उत्तर प्रदेश में फर्जी कफ सिरप रैकेट के सिंडिकेट की जांच में एक के बाद एक नए नए खुलासे हो रहे हैं. एसटीएफ ने अमित टाटा नाम के एक आरोपी की गिरफ्तारी भी की है, लेकिन अभी भी इस नेक्सस के किंगपिन के नाम का खुलासा होना बाकी है। पूर्वांचल में बनने वाले ये फर्जी कफ सिरप बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और यहां तक की बांग्लादेश तक भेजा जाता था। हालांकि अब यूपी एसटीएफ ने इस पूरे रैकेट को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
कोडीन युक्त कफ सिरप का रैकेट लंबे समय से सक्रिय है। कफ सिरप में मिलावट की जानकारी आने के बाद शुरू हुई जांच कि परतें जब खुलने लगीं तो यूपी में चल रहे इस सिंडिकेट का भी खुलासा हुआ। इस मामले में अब तक करीब 40 एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। यूपी एसटीएफ ने वाराणसी के रहने वाले अमित टाटा को गिरफ्तार किया है, वहीं शुभम जयसवाल नाम का आरोपी अभी भी पकड़ से बाहर है।
यह पूरा नेटवर्क वाराणसी और जौनपुर के इर्दगिर्द सक्रिय था। झारखंड की फर्म के साथ मिलकर ये कफ सिरप के नाम पर फर्जीवाड़े में लगे हुए थे।
👉 इस तरह से जानिए पूरे मामले को—
रांची के मेसर्स शैली ट्रेंड्स कंपनी से 37 लाख सिरप की बोतल सप्लाई की। 12 मेडिकल स्टोर्स के जरिए इनको बेचने का काम हुआ। इन मेडिकल स्टोर्स/फर्म्स पर फर्जी दस्तावेजों से 57 करोड़ की बिक्री दिखाई गई। इन कफ सिरप्स को बिहार, झारखंड, बंगाल और बांग्लादेश भेजा गया। मेडिकल स्टोर्स के मालिक जौनपुर के निकले, वहीं आरोपी वाराणसी में हैं। आरोपियों में अमित सिंह टाटा और शुभम जयसवाल का नाम सामने आया। इन दोनों के संबंध धनंजय सिंह से होने की वजह से धनंजय सिंह भी सवालों के घेरे में।
📢 धनंजय सिंह ने दी अपनी सफाई—
इस सिंडिकेट में शामिल आरोपियों की कुछ तस्वीरें पूर्व बाहुबली सांसद धनंजय सिंह के साथ सोशल मीडिया में वायरल हुईं तो धनंजय सिंह का नाम भी इस कफ सिरप के खेल में उछल गया। अब धनंजय सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट लिखकर सफाई देते हुए पीएम मोदी से इस मामले में सीबीआई जांच कराने की मांग कर दी है।
🔥 पूर्वांचल से बांग्लादेश तक फैला जाल—
ड्रग का ये खेल सिर्फ यूपी के पूर्वांचल तक ही सीमित नहीं था। बताया जा रहा है कि पूर्वांचल में बनने वाले ये फर्जी कफ सिरप बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और यहां तक की बांग्लादेश तक भेजा जाता था यानी लाखों बच्चों को दवा के नाम पर जहर की सप्लाई की जा रही थी। इस मामले में एसटीएफ के अलावा जिलों के भी पुलिस लगातार छानबीन कर रही है।
⚔️ सौ करोड़ से ज्यादा का सिंडिकेट—
इस मामले में विपक्ष ने सरकार को घेरकर आरोपियों की बचाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। फिलहाल कफ सिरप का ये सिंडिकेट सौ करोड़ रुपयों से ज्यादा का अंदाजा लगाया जा रहा है। जैसे जैसे इस मामले की परतें खुलेंगी, वैसे वैसे कई सफेदपोश लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।










